Addction is A Disease / Delhi / Ghazlabad/ Noida / “ Rehabilitation Center In INDIA ”

बिमारी को समझने की जरूरत है। हमारे समाज को समझने की जरूरत है कि नशा कोई लत नहीं है यह एक बिमारी है एक मानसिक बीमारी है और इसके तीन भाग है। १.मानसिक खिंचाव २.शारीरिक मांग ३.अध्यात्मिक शून्यता अगर किसी व्यक्ति को कोई और बिमारी लग जाती है तो लोग उसके प्रति हमदर्दी रखते हैं उससे मिलने जाते है उसे दिलासा देते है। इस बिमारी में बिल्कुल उल्टा है लोग दूर भागते हैं नफरत करते है। और इस बीमारी की शुरुआत होती है ब्यक्ति के व्यवहारों में बदलाव से छोटी उम्र में नकारात्मक चीजों के प्रति आकर्षण खुद को औरों से अलग साबित करने की कोशिश आत्मविश्वास को विकसित करने की कोशिश में कब जिदंगी में नशा आ जाता है और कब वो नशा एक बिमारी का रूप लेकर एक शारीरिक मांग बन जाता है पता नहीं चलता पर तब तक वहुत देर हो चुकी होती है। शारीरिक मांग को तो आप समझ ही सकते हो जैसे आप की शारीरिक मांग प्यास लगने पर पानी या भुख लगने पर भोजन है वैसे ही एक नशेबाज की मांग नशा है। वो मजबूर है शक्तिहीन है और ऊपर से समाज उसे घृणा की नजर से देखने लगता है उसे दुत्कारता है जिससे कि उसके अंदर समाज के प्रति घृणा उत्पन्न होती है और वो अध्यात्मिक शून्यता में जाकर समाज का विरोधी वन कर और ज्यादा नशे की गतिविधियों में लिप्त होता चला जाता है। और यहीं से वो अपनी नशे की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपराधिक गतिविधियों में भाग लेना शुरू कर देता है। पर उसे इस चीज का आभास नहीं होता कि यह जो नशा मैं कर रहा हूं यह मुझे अन्दर ही अन्दर से एक दीमक की तरह चाट रहा है। जब तक उसे इस बात का अहसास होता है वहुत देर हो चुकी होती है। सब अपने उसके दोस्त, रिश्ते, समाज उससे दूर जा चुके होते हैं कोई उसका साथ देने को तैयार नहीं होता। अब बो नशेबाज आत्मग्लानि में जी रहा है खुद को कोस रहा है उसे मदद की जरूरत है पर सब तो उससे नफरत करते हैं। और वो अपने दम पर नशा नहीं छोड़ पा रहा क्योंकि नशा नशा करना उसकी शारीरिक मांग है। नशा करना उसकी मजबूरी बन चुका है वो छोड़ भी नहीं पा रहा और पी भी नहीं पा रहा है। ऐसे में उसे जरूरत है किसी के साथ की जिससे वो अपने दिल की बात बता सकता है। और एक समझने वाले की जो उसे समझ सकता है और हर तरह से उसकी मदद करने के लिए तैयार हो सकता है। आज हमारे समाज में यह एक विकराल समस्या बन रही है हमें ज़रूरत है खुल कर सामने आने की और इस बात को स्वीकार करने की कि हमारे घरों में मोहल्ले में शहर में यह समस्या एक विकराल रूप धारण कर चुकी है और आगे और भी ज्यादा विकराल रूप धारण करेगी। कल को मेरे या आपके घरों में भी यह समस्या आ सकती है। मेरा मकसद आप को जागरूक करना है डराना नहीं क्योंकि इस बीमारी से लड़ने का एक और एक ही तरीका है जागरूकता। अवर्नेस् नशामुक्ति इस बीमरी में मदद् करता हैं क्योंकि दुनिया में अभी तक कोई ऐसी दवाई नहीं बनीं जो इन्सान की सोच को बदल सके और ये बिमारी है ही व्यवहारों और विचारों की। मेरी सभी से गुजारिश है आगे आएं और जागरूक बने और शुरुआत अपने घर से करें।

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